महाभारत 1.48.8असितो देवलश्चैव नारदः पर्वतस्तथाआत्रेयः कुण्डजठरो द्विजः कुटिघटस्तथाasito devalaścaiva nāradaḥ parvatastathāātreyaḥ kuṇḍajaṭharo dvijaḥ kuṭighaṭastathāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें