महाभारत 1.49.18
अहं त्वां मोक्षयिष्यामि वासुके पन्नगोत्तमतस्माच्छापान्महासत्त्व सत्यमेतद्ब्रवीमि ते
ahaṃ tvāṃ mokṣayiṣyāmi vāsuke pannagottamatasmācchāpānmahāsattva satyametadbravīmi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें