महाभारत 1.49.24
ब्रह्मदण्डं महाघोरं कालाग्निसमतेजसम्नाशयिष्यामि मात्र त्वं भयं कार्षीः कथंचन
brahmadaṇḍaṃ mahāghoraṃ kālāgnisamatejasamnāśayiṣyāmi mātra tvaṃ bhayaṃ kārṣīḥ kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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