महाभारत 1.49.25
सूत उवाच · sūta uvāca
ततः स वासुकेर्घोरमपनीय मनोज्वरम्आधाय चात्मनोऽङ्गेषु जगाम त्वरितो भृशम्
tataḥ sa vāsukerghoramapanīya manojvaramādhāya cātmano'ṅgeṣu jagāma tvarito bhṛśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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