महाभारत 1.49.26
जनमेजयस्य तं यज्ञं सर्वैः समुदितं गुणैःमोक्षाय भुजगेन्द्राणामास्तीको द्विजसत्तमः
janamejayasya taṃ yajñaṃ sarvaiḥ samuditaṃ guṇaiḥmokṣāya bhujagendrāṇāmāstīko dvijasattamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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