महाभारत 1.49.4
सूत उवाच · sūta uvāca
तत आचष्ट सा तस्मै बान्धवानां हितैषिणीभगिनी नागराजस्य जरत्कारुरविक्लवा
tata ācaṣṭa sā tasmai bāndhavānāṃ hitaiṣiṇībhaginī nāgarājasya jaratkāruraviklavā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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