महाभारत 1.49.9वासुकिश्चापि तच्छ्रुत्वा पितामहवचस्तदाअमृते मथिते तात देवाञ्शरणमीयिवान्vāsukiścāpi tacchrutvā pitāmahavacastadāamṛte mathite tāta devāñśaraṇamīyivānइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें