महाभारत 1.5.16
तां तु रक्षस्ततो ब्रह्मन्हृच्छयेनाभिपीडितम्दृष्ट्वा हृष्टमभूत्तत्र जिहीर्षुस्तामनिन्दिताम्
tāṃ tu rakṣastato brahmanhṛcchayenābhipīḍitamdṛṣṭvā hṛṣṭamabhūttatra jihīrṣustāmaninditām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें