महाभारत 1.5.8
रुरोरपि सुतो जज्ञे शुनको वेदपारगःप्रमद्वरायां धर्मात्मा तव पूर्वपितामहात्
rurorapi suto jajñe śunako vedapāragaḥpramadvarāyāṃ dharmātmā tava pūrvapitāmahāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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