महाभारत 1.53.35
सूत उवाच · sūta uvāca
हन्त ते कथयिष्यामि महदाख्यानमुत्तमम्कृष्णद्वैपायनमतं महाभारतमादितः
hanta te kathayiṣyāmi mahadākhyānamuttamamkṛṣṇadvaipāyanamataṃ mahābhāratamāditaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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