महाभारत 1.55.26
तत्र ते न्यवसन्राजन्संवत्सरगणान्बहून्वशे शस्त्रप्रतापेन कुर्वन्तोऽन्यान्महीक्षितः
tatra te nyavasanrājansaṃvatsaragaṇānbahūnvaśe śastrapratāpena kurvanto'nyānmahīkṣitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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