महाभारत 1.56.13
इदं शतसहस्रं हि श्लोकानां पुण्यकर्मणाम्सत्यवत्यात्मजेनेह व्याख्यातममितौजसा
idaṃ śatasahasraṃ hi ślokānāṃ puṇyakarmaṇāmsatyavatyātmajeneha vyākhyātamamitaujasā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें