महाभारत 1.56.19
जयो नामेतिहासोऽयं श्रोतव्यो विजिगीषुणामहीं विजयते सर्वां शत्रूंश्चापि पराजयेत्
jayo nāmetihāso'yaṃ śrotavyo vijigīṣuṇāmahīṃ vijayate sarvāṃ śatrūṃścāpi parājayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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