महाभारत 1.57.37तदहः पितरश्चैनमूचुर्जहि मृगानितितं राजसत्तमं प्रीतास्तदा मतिमतां वरम्tadahaḥ pitaraścainamūcurjahi mṛgānititaṃ rājasattamaṃ prītāstadā matimatāṃ varamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें