महाभारत 1.58.16एवमायुष्मतीभिस्तु प्रजाभिर्भरतर्षभइयं सागरपर्यन्ता समापूर्यत मेदिनीevamāyuṣmatībhistu prajābhirbharatarṣabhaiyaṃ sāgaraparyantā samāpūryata medinīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें