महाभारत 1.59.16
एकादशस्तथा त्वष्टा विष्णुर्द्वादश उच्यतेजघन्यजः स सर्वेषामादित्यानां गुणाधिकः
ekādaśastathā tvaṣṭā viṣṇurdvādaśa ucyatejaghanyajaḥ sa sarveṣāmādityānāṃ guṇādhikaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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