महाभारत 1.59.18
प्रह्रादः पूर्वजस्तेषां संह्रादस्तदनन्तरम्अनुह्रादस्तृतीयोऽभूत्तस्माच्च शिबिबाष्कलौ
prahrādaḥ pūrvajasteṣāṃ saṃhrādastadanantaramanuhrādastṛtīyo'bhūttasmācca śibibāṣkalau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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