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महाभारत 1.59.19
प्रह्रादस्य त्रयः पुत्राः ख्याताः सर्वत्र भारतविरोचनश्च कुम्भश्च निकुम्भश्चेति विश्रुताः
prahrādasya trayaḥ putrāḥ khyātāḥ sarvatra bhāratavirocanaśca kumbhaśca nikumbhaśceti viśrutāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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