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महाभारत 1.59.21
चत्वारिंशद्दनोः पुत्राः ख्याताः सर्वत्र भारततेषां प्रथमजो राजा विप्रचित्तिर्महायशाः
catvāriṃśaddanoḥ putrāḥ khyātāḥ sarvatra bhāratateṣāṃ prathamajo rājā vipracittirmahāyaśāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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