महाभारत 1.59.24
स्वर्भानुरश्वोऽश्वपतिर्वृषपर्वाजकस्तथाअश्वग्रीवश्च सूक्ष्मश्च तुहुण्डश्च महासुरः
svarbhānuraśvo'śvapatirvṛṣaparvājakastathāaśvagrīvaśca sūkṣmaśca tuhuṇḍaśca mahāsuraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें