महाभारत 1.59.2
आदिश्य च स्वयं शक्रः सर्वानेव दिवौकसःनिर्जगाम पुनस्तस्मात्क्षयान्नारायणस्य ह
ādiśya ca svayaṃ śakraḥ sarvāneva divaukasaḥnirjagāma punastasmātkṣayānnārāyaṇasya ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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