महाभारत 1.59.36
त्वष्टावरस्तथात्रिश्च द्वावन्यौ मन्त्रकर्मिणौतेजसा सूर्यसंकाशा ब्रह्मलोकप्रभावनाः
tvaṣṭāvarastathātriśca dvāvanyau mantrakarmiṇautejasā sūryasaṃkāśā brahmalokaprabhāvanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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