महाभारत 1.59.4
ततो ब्रह्मर्षिवंशेषु पार्थिवर्षिकुलेषु चजज्ञिरे राजशार्दूल यथाकामं दिवौकसः
tato brahmarṣivaṃśeṣu pārthivarṣikuleṣu cajajñire rājaśārdūla yathākāmaṃ divaukasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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