महाभारत 1.59.8
श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन संभवं कृत्स्नमादितःप्राणिनां चैव सर्वेषां सर्वशः सर्वविद्ध्यसि
śrotumicchāmi tattvena saṃbhavaṃ kṛtsnamāditaḥprāṇināṃ caiva sarveṣāṃ sarvaśaḥ sarvaviddhyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें