महाभारत 1.61.42
वृत्र इत्यभिविख्यातो यस्तु राजन्महासुरःमणिमान्नाम राजर्षिः स बभूव नराधिपः
vṛtra ityabhivikhyāto yastu rājanmahāsuraḥmaṇimānnāma rājarṣiḥ sa babhūva narādhipaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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