महाभारत 1.61.58आषाढो वायुवेगश्च भूरितेजास्तथैव चएकलव्यः सुमित्रश्च वाटधानोऽथ गोमुखःāṣāḍho vāyuvegaśca bhūritejāstathaiva caekalavyaḥ sumitraśca vāṭadhāno'tha gomukhaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें