महाभारत 1.61.80
कलेरंशात्तु संजज्ञे भुवि दुर्योधनो नृपःदुर्बुद्धिर्दुर्मतिश्चैव कुरूणामयशस्करः
kaleraṃśāttu saṃjajñe bhuvi duryodhano nṛpaḥdurbuddhirdurmatiścaiva kurūṇāmayaśaskaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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