महाभारत 1.61.88
द्रौपदेयाश्च ये पञ्च बभूवुर्भरतर्षभविश्वेदेवगणान्राजंस्तान्विद्धि भरतर्षभ
draupadeyāśca ye pañca babhūvurbharatarṣabhaviśvedevagaṇānrājaṃstānviddhi bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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