महाभारत 1.61.95
श्रियस्तु भागः संजज्ञे रत्यर्थं पृथिवीतलेद्रुपदस्य कुले कन्या वेदिमध्यादनिन्दिता
śriyastu bhāgaḥ saṃjajñe ratyarthaṃ pṛthivītaledrupadasya kule kanyā vedimadhyādaninditā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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