महाभारत 1.63.19
राज्ञा चाद्भुतवीर्येण योधैश्च समरप्रियैःलोड्यमानं महारण्यं तत्यजुश्च महामृगाः
rājñā cādbhutavīryeṇa yodhaiśca samarapriyaiḥloḍyamānaṃ mahāraṇyaṃ tatyajuśca mahāmṛgāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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