महाभारत 1.63.20
तत्र विद्रुतसंघानि हतयूथपतीनि चमृगयूथान्यथौत्सुक्याच्छब्दं चक्रुस्ततस्ततः
tatra vidrutasaṃghāni hatayūthapatīni camṛgayūthānyathautsukyācchabdaṃ cakrustatastataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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