महाभारत 1.64.26रथिनीमश्वसंबाधां पदातिगणसंकुलाम्अवस्थाप्य वनद्वारि सेनामिदमुवाच सःrathinīmaśvasaṃbādhāṃ padātigaṇasaṃkulāmavasthāpya vanadvāri senāmidamuvāca saḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें