महाभारत 1.64.28
तद्वनं नन्दनप्रख्यमासाद्य मनुजेश्वरःक्षुत्पिपासे जहौ राजा हर्षं चावाप पुष्कलम्
tadvanaṃ nandanaprakhyamāsādya manujeśvaraḥkṣutpipāse jahau rājā harṣaṃ cāvāpa puṣkalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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