महाभारत 1.64.39
आसनानि विचित्राणि पुष्पवन्ति महीपतिःप्रयत्नोपहितानि स्म दृष्ट्वा विस्मयमागमत्
āsanāni vicitrāṇi puṣpavanti mahīpatiḥprayatnopahitāni sma dṛṣṭvā vismayamāgamat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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