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महाभारत 1.65.11
विभ्राजमानां वपुषा तपसा च दमेन चरूपयौवनसंपन्नामित्युवाच महीपतिः
vibhrājamānāṃ vapuṣā tapasā ca damena carūpayauvanasaṃpannāmityuvāca mahīpatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविभ्राजमानां वपुषा तपसा च दमेन चरूपयौवनसंपन्नामित्युवाच महीपतिः
vibhrājamānāṃ vapuṣā tapasā ca damena carūpayauvanasaṃpannāmityuvāca mahīpatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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