महाभारत 1.65.20
तप्यमानः किल पुरा विश्वामित्रो महत्तपःसुभृशं तापयामास शक्रं सुरगणेश्वरम्
tapyamānaḥ kila purā viśvāmitro mahattapaḥsubhṛśaṃ tāpayāmāsa śakraṃ suragaṇeśvaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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