महाभारत 1.65.26रूपयौवनमाधुर्यचेष्टितस्मितभाषितैःलोभयित्वा वरारोहे तपसः संनिवर्तयrūpayauvanamādhuryaceṣṭitasmitabhāṣitaiḥlobhayitvā varārohe tapasaḥ saṃnivartayaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें