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महाभारत 1.65.41
कामं तु मे मारुतस्तत्र वासः; प्रक्रीडिताया विवृणोतु देवभवेच्च मे मन्मथस्तत्र कार्ये; सहायभूतस्तव देवप्रसादात्
kāmaṃ tu me mārutastatra vāsaḥ; prakrīḍitāyā vivṛṇotu devabhavecca me manmathastatra kārye; sahāyabhūtastava devaprasādāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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