महाभारत 1.65.7
तामब्रवीत्ततो राजा कन्यां मधुरभाषिणीम्दृष्ट्वा सर्वानवद्याङ्गीं यथावत्प्रतिपूजितः
tāmabravīttato rājā kanyāṃ madhurabhāṣiṇīmdṛṣṭvā sarvānavadyāṅgīṃ yathāvatpratipūjitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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