Loading
महाभारत 1.67.10
प्रशस्तांश्चतुरः पूर्वान्ब्राह्मणस्योपधारयषडानुपूर्व्या क्षत्रस्य विद्धि धर्म्याननिन्दिते
praśastāṃścaturaḥ pūrvānbrāhmaṇasyopadhārayaṣaḍānupūrvyā kṣatrasya viddhi dharmyānanindite
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें