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महाभारत 1.68.12
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे प्रातिष्ठन्तामितौजसःशकुन्तलां पुरस्कृत्य सपुत्रां गजसाह्वयम्
tathetyuktvā tu te sarve prātiṣṭhantāmitaujasaḥśakuntalāṃ puraskṛtya saputrāṃ gajasāhvayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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