महाभारत 1.68.18
सोऽथ श्रुत्वैव तद्वाक्यं तस्या राजा स्मरन्नपिअब्रवीन्न स्मरामीति कस्य त्वं दुष्टतापसि
so'tha śrutvaiva tadvākyaṃ tasyā rājā smarannapiabravīnna smarāmīti kasya tvaṃ duṣṭatāpasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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