महाभारत 1.68.20
सैवमुक्ता वरारोहा व्रीडितेव मनस्विनीविसंज्ञेव च दुःखेन तस्थौ स्थाणुरिवाचला
saivamuktā varārohā vrīḍiteva manasvinīvisaṃjñeva ca duḥkhena tasthau sthāṇurivācalā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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