महाभारत 1.68.26
योऽन्यथा सन्तमात्मानमन्यथा प्रतिपद्यतेकिं तेन न कृतं पापं चोरेणात्मापहारिणा
yo'nyathā santamātmānamanyathā pratipadyatekiṃ tena na kṛtaṃ pāpaṃ coreṇātmāpahāriṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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