महाभारत 1.68.51
आत्मनो जन्मनः क्षेत्रं पुण्यं रामाः सनातनम्ऋषीणामपि का शक्तिः स्रष्टुं रामामृते प्रजाः
ātmano janmanaḥ kṣetraṃ puṇyaṃ rāmāḥ sanātanamṛṣīṇāmapi kā śaktiḥ sraṣṭuṃ rāmāmṛte prajāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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