महाभारत 1.68.7
ततोऽस्य नाम चक्रुस्ते कण्वाश्रमनिवासिनःअस्त्वयं सर्वदमनः सर्वं हि दमयत्ययम्
tato'sya nāma cakruste kaṇvāśramanivāsinaḥastvayaṃ sarvadamanaḥ sarvaṃ hi damayatyayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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