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महाभारत 1.69.1
शकुन्तलोवाचराजन्सर्षपमात्राणि परच्छिद्राणि पश्यसिआत्मनो बिल्वमात्राणि पश्यन्नपि न पश्यसि
śakuntalovācarājansarṣapamātrāṇi paracchidrāṇi paśyasiātmano bilvamātrāṇi paśyannapi na paśyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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