महाभारत 1.69.37
तं विशोध्य तदा राजा देवदूतेन भारतहृष्टः प्रमुदितश्चापि प्रतिजग्राह तं सुतम्
taṃ viśodhya tadā rājā devadūtena bhāratahṛṣṭaḥ pramuditaścāpi pratijagrāha taṃ sutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें