महाभारत 1.69.3क्षितावटसि राजंस्त्वमन्तरिक्षे चराम्यहम्आवयोरन्तरं पश्य मेरुसर्षपयोरिवkṣitāvaṭasi rājaṃstvamantarikṣe carāmyahamāvayorantaraṃ paśya merusarṣapayorivaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें