महाभारत 1.70.21
स हि गन्धर्वलोकस्थ उर्वश्या सहितो विराट्आनिनाय क्रियार्थेऽग्नीन्यथावद्विहितांस्त्रिधा
sa hi gandharvalokastha urvaśyā sahito virāṭānināya kriyārthe'gnīnyathāvadvihitāṃstridhā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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